कार्तिक पूर्णिमा पर पुण्य स्नान हो रहा है। काशी-संगम में करीब 10 लाख श्रद्धालु गंगा स्नान कर चुके हैं। वहीं, अयोध्या में सरयू नदी के घाटों पर 15 लाख श्रद्धालु स्नान कर रहे हैं। सरयू की धारा में डुबकी के बाद लोग सूर्य को अर्ध्य दे रहे हैं। भगवान कार्तिकेय की पूजा-अर्चना कर परिवार के निरोग रहने की कामना कर रहे हैं।
ग्रह नक्षत्रों के दुर्लभ संयोग की वजह से इस बार कार्तिक पूर्णिमा के स्नान का विशेष महत्व है। यही वजह है कि सूर्य की पहली किरण निकलने से पहले ही हजारों श्रद्धालु इकट्ठे हो गए। कई घाटों पर तो पैर रखने की भी जगह नहीं बची। काशी हो या प्रयागराज। सभी घाटों पर सत्यनारायण की कथा भी सुनी जा रही है।
आज दोपहर 3:36 बजे तक कार्तिक पूर्णिमा का स्न्नान चलेगा। प्रशासन ने मेला क्षेत्र को 3 जोन के 15 सेक्टर में बांटा है। श्रद्धालुओं के सुविधा के लिए स्नान घाटों पर पुलिस, एसडीआरएफ और बाढ़ राहत के जवान तैनात किए गए हैं। अयोध्या में कल्पवास करने वाले लोगों के लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। आज कल्प वास करने वालों का अनुष्ठान पूरा होगा।
परिक्रमा में आए श्रद्धालुओं की आज होगी वापसी
14 कोसी व पंचकोसी परिक्रमा के लिए आए अधिकांश श्रद्धालुओं की वापसी हो गई है। पूर्णिमा स्नान के बाद यहां से श्रद्धालु घरों के लिए वापसी करेंगे। क्षेत्राधिकारी एसपी गौतम ने बताया कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान के लिए घाटों, प्रमुख मंदिरों एवं संवेदनशील स्थानों पर पीएसी, आरएएफ व सिविल पुलिस के साथ एटीएस भी तैनात की गई है।
प्रयागराज में 7 लाख श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
संगम समेत प्रयागराज के तमाम घाटों पर आज आस्था की डुबकी लग रही है। करीब 7 लाख श्रद्धालु यहां स्नान कर रहे हैं। सुरक्षा को लेकर भी यहां पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। शाम को यहां भी देव दीवाली धूमधाम से मनाई जाएगी।
कार्तिकेय की पूजा और स्नान से होती हैं मनोकामना पूरी
मान्यताओं के मुताबिक कार्तिक पूर्णिमा के ही दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय का जन्म हुआ था। जबकि सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु ने आज ही के दिन मत्स्यावतार रूप धारण किया था। इस कारण कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान और पूजा अर्चना करने वाले को अक्षय पुण्य और स्वस्थ जीवन की प्राप्ति होती है। इसी वजह से संगम नगरी प्रयागराज में त्रिवेणी की धारा और अयोध्या में सरयू घाट पर स्नान करने वालो की भारी भीड़ उमड़ी हुई है।
ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास के आखिरी स्नान पर्व कार्तिक पूर्णिमा पर गंगा और यमुना नदियों में स्नान से ही सभी मनोकामनायें पूर्ण होती हैं। इस मौके पर गंगा और यमुना नदियों में श्रद्धालु दीपदान भी करते हैं। कार्तिक पूर्णिमा पर ही देव दीवाली का भी पर्व मनाया जाता है। यहां आने वाले श्रद्धालु स्नान और पूजा-अर्चना के साथ ही दान-पुण्य भी कर रहे हैं।