पुराणों के अनुसार त्रिवेणी संगम तट पर स्नान करने के लाभ क्या है।
Updated on
01-01-1970 12:00 AM
प्रयागराज मे त्रिवेणी संगम है जहाँ पर हर महीने अमावस्या और पूर्णिमा को श्रद्धालु स्नान करने के लिये जाते है। इसे त्रिवेणी संगम इसलिये कहा जाता है क्योंकि गंगा, यमुना, सरस्वती तीनो नदियो का यहाँ पर मिलन होता है इसीलिये इसे त्रिवेणी संगम कहते है। माँ गंगा को पापनाशनी तथा मोक्षदायिनी कहा गया है। यहाँ पर प्रतिवर्ष जनवरी माह मे एक महीने के लिये माघ मेला लगता है। इस दौरान यहाँ पर प्रतिदिन लाखो की संख्या मे श्रद्धालु इस त्रिवेणी संगम तट पर स्नान करने के लिये पहुचते है। यहाँ पर हर 6 वर्ष मे अर्धकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है तथा 12 वर्षों मे यहाँ पर महाकुंभ मेले का आयोजन किया जाता है।
पुराणों के अनुसार त्रिवेणी संगम तट पर स्नान करने के लाभ-
पुराणों के अनुसार त्रिवेणी संगम तट पर स्नान करने से व्यक्ति के समस्त पाप कट जाते है क्योंकि माँ गंगा को पापनाशनी तथा मोक्षदायिनी कहा गया है।
दोस्तो यहाँ पर आपको गंगा और यमुना जी का जल स्पष्ट दिखाई देगा लेकिन माता सरस्वती जी का जल विलुप्त होता है। यहाँ माँ गंगा का जल मटमैला, यमुना जी का जल हरा तथा माता सरस्वती का जल सफेद होता है।
पुराणों के अनुसार तीर्थों मे संगम को सभी तीर्थों का अधिपति माना गया है तथा सप्त पुरियों को इनकी रानियाँ कहा गया है। त्रिवेणी संगम होने के कारण इसे यज्ञ वेदी भी कहा गया है। पदम पुराण के अनुसार ऐसा माना गया है कि जो त्रिवेणी संगम पर स्नान करता है उसे मोक्ष प्राप्त होता है।
यहाँ पर प्रत्येक 6 वर्ष मे अर्धकुंभ तथा 12 वर्षों मे महाकुंभ का आयोजन किया जाता है। त्रिवेणी संगम पर कुंभ मेले मे भक्तो की संख्या लगभग एक करोड से भी ज्यादा होती है।
यहाँ पर प्रथम स्नान से लेकर अंतिम स्नान तक रामायण, महाभारत, श्रीमद भागवत, वेद, उपनिषद तथा पुराणों के आख्यान सुनने को मिलते है।
संगम तट पर स्नान करने की विधि-
यदि आप संगम तट पर स्नान करने के लिये जा रहे है तो इस बात का ध्यान रखियेगा कि यदि आप वहाँ पर गेस्ट हाउस, धर्मशाला, या अपने मित्र के यहाँ आप रूके है तो आपको वहाँ से नहाकर संगम नही जाना है। आपको बिना वहाँ से नहाये सीधे संगम तट पर आना है और वही पर स्नान करना है।
जब आप संगम स्नान करने के लिये जाये तो आप एक जोडी कपडा अपने साथ जरूर रखे आपको संगम मे स्नान करने के बाद जो कपडा आप अपने साथ ले गये है उसी को आपको पहनना चाहिये।
संगम मे स्नान करने के दौरान आपको अपने साथ छोटे-छोटे आटे की लोई या फिर भुना हुआ धान अपने साथ लेकर जाना चाहिये। संगम मे स्नान करने के बाद आपको आटे की लोई या भुना हुआ धान जल मे फेकना चाहिये ताकि वहाँ पर मौजूद पक्षी तथा मछलियां उसे खा सके जिससे आपको बहुत पुण्य मिलेगा।
संगट तट पर स्नान करते समय जल क्रीडा नही करनी चाहिये क्योंकि ऐसा करना माँ गंगा का अपमान करना माना जाता है।
एक बात का ध्यान रखियेगा कि संगट तट पर आपको नहाने के बाद वस्त्रों को नदी मे नही धुलना है। बल्कि आप उन वस्त्रों को बैग मे भर लीजिये और घर पर आकर कपडो को धुल लीजियेगा।
संगम तट पर स्नान करने के दौरान कभी भी गंदी चीजो जैसे कि मल मूत्र इत्यादि का त्याग नही करना चाहिये क्योंकि यदि आप ऐसा करते है तो यह पाप की श्रेणी मे आता है।
संगम तट पर स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल जरूर चढाना चाहिये।
हिंदू तीर्थ स्थान गंगोत्री – Gangotri Templeबहुत से तीर्थयात्री अपनी यात्रा को गंगोत्री में ही समाप्त नहीं करते हैं और वे आगे ग्लेशियर तक जाना पसंद करते हैं जहां नदी…
भारत में गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र, नर्मदा और कावेरी नदी का बहुत अधिक धार्मिक महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन नदियों में स्नान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती…
हिन्दूधर्म में नदियों को पवित्र और पूजनीय माना जाता है। नदियों को सनातना परंपरा में मां का दर्जा हासिल है।मान्यता है कि इन पवित्र नदियों में स्नान से व्यक्ति के…
भारत में नदियों का धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व रहा है। प्राचीन काल से ही नदियों ने मां की तरह हमारा भरण पोषण किया है। नदियों के कारण ही सभ्यता…