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कहां है दक्षिण गंगा, चंबल नदी में क्यों नहीं करते स्नान

Updated on 01-01-1970 12:00 AM

आपने चंबल नदी के बारे मे जरूर सुना होगा। हमारे भारत देश मे बहुत सी पवित्र नदियां है जहाँ पर लोग स्नान करके पापमुक्त हो जाते है जैसे कि गंगा नदी। गंगा नदी को पापनाशिनी और मोक्षदायिनी कहा जाता है। आपको पता होगा कि राजा सगर के 60 हजार पुत्रो को अकाल मृत्यु प्राप्त हुआ था। अपने पूर्वजों की आत्मा की मुक्ति के लिये भगीरथ ने माँ गंगा को धरती पर लाया। माँ गंगा के जल के स्पर्श से राजा सगर के 60 हजार पुत्रो को मोक्ष मिला था। लेकिन दोस्तो क्या आपको पता है कि लोग चंबल नदी मे स्नान नही करते है। आज हम इसके बारे मे आपको विस्तार से बतायेंगे।

चंबल नदी मे लोग स्नान क्यो नही करते है-

दोस्तो चंबल नदी मध्य प्रदेश के महू इंदौर से निकलने वाली नदी है। बाग्लादेश मे प्रवेश करने पर गंगा को पद्या नदी के नाम से जाना जाता है। गोदावरी को दक्षिण गंगा के नाम से जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि चंबल भारत की सबसे स्वच्छ नदी है लोग चंबल नदी मे स्नान नही करते है क्योकि एक कहानी के अनुसार जो कि चंबल के पानी को छूता है या उसमे स्नान करता है

वो शापित हो जाता है। इस चंबल नदी मे बिल्कुल भी प्रदूषण नदी है इसीलिये इस नदी मे सबसे ज्यादा संख्या मे जलीय जीव पाये जाते है। यमुना नदी का प्रदूषण साफ करने का काम चंबल नदी ही करता है। इसी नदी के कारण इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश) मे यमुना नदी के भव्य दर्शन होते है। यदि आप दिल्ली और आगरा मे यमुना नदी की स्थिति देखे तो आपको बिल्कुल नाले का पानी लगेगा।

चंबल नदी का उदगम कैसे हुआ-

दोस्तो कथाओ के अनुसार प्राचीन समय मे राजा रंतिदेव नाम के एक दानवीर राजा थे। उनके दरबार मे जो कोई भी जाता वह खाली हाथ कभी भी नही लौटता था। एक बार राजा रंतिदेव के राज्य मे अकाल पड गया उन्होंने अपना सबकुछ दान कर दिया। 56 दिनो तक राजा रंतिदेव ने भोजन नही किया। जब उनके पास अंतिम दो दिन का भोजन बचा हुआ था तभी दो भूखे नागरिक उनके पास आते है और भोजन मांगते है तब राजा ने अपना भोजन उन दोनो को दान कर दिया अब उनके पास सिर्फ एक कलश पानी बचा था।

तभी एक व्यक्ति अपना जानवर राजा रंतिदेव के पास लेकर आता है उसका जानवर बहुत प्यासा था। अतः उसके अपने जानवर की प्यास बुझाने के लिये राजा रंतिदेव से पानी मांगा राजा इतने दयालु थे कि उन्होंने कलश मे बचा पानी भी दान कर दिया। दोस्तो ब्रम्हा, विष्णु और महेश इन तीनो ने ही मिलकर राजा रंतिदेव के दान की परीक्षा ली थी और परीक्षा मे राजा रंतिदेव सफल हो गये और इन्हे पृथ्वी का सबसे महान दानवीर राजा घोषित किया गया।

दोस्तो कहा जाता है कि राजा रंतिदेव द्वारा किये गये अनगिनत यज्ञ अनुष्ठानों की शेष सामग्री से चंबल नदी का उदगम हुआ है। यह भी कहा जाता है कि यज्ञ के दौरान राजा पशु बलि दिया करते थे। बलि के बाद पशुओं के अवशेष यज्ञ स्थल से कुछ दूरी पर रख दिये जाते थे। इन्ही अवशेषो से चंबल नदी का उदगम हुआ है। यही कारण है कि इस नदी को पवित्र नदी का दर्जा प्राप्त नही है। इसी कारण चंबल नदी मे स्नान नही किया जाता है।



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