गरूड पुराण के अनुसार मोहमाया मे फसे व्यक्ति के साथ क्या होता है।

 हमारे हिन्दू धर्म शास्त्र गरुड़ पुराण मे मृत्यु के बाद होने वाली घटनाओं का तथा उसका क्या परिणाम मिलने वाला है इन सबका विस्तार से वर्णन किया गया है। सबसे पहले आप मोहमाया का मतलब समझ लीजिये दोस्तो मोह का मतलब अपनो के प्रति लगाव होता है तथा माया का मतलब धन दौलत होता है।

गरुड़ पुराण के अनुसार मोहमाया मे फसे व्यक्ति के साथ क्या होता है-

आप सभी जानते है कि गुरूड पुराण के अनुसार यह दुनिया एक मोहमाया का बाजार है और व्यक्ति जब तक जीवित रहता है वह अपने परिवार के मोह मे इस कदर जकडा रहता है कि उसे यह ध्यान ही नही रहता है कि हमें भी एक दिन मरना है। व्यक्ति जब तक जीवित रहता है वह सिर्फ और सिर्फ अपने परिवार के बारे मे ही सोचता है। वह यह सोचता है कि मै कितना धन दौलत कमा लू, कितनी प्रापर्टी बना लू? यहाँ तक कि आज का समय देखो लोग पैसा कमाने के लिये आज के समय मे अपना जिस्म तक बेच देते है।

पैसा कमाने के लिये लोग चोरी, डकैती, मर्डर ये सब भी करने से पीछे नही हटते। ऐसा कोई पाप नही जो आज के समय मे व्यक्ति न करता हो। उसे अपने बारे मे बिल्कुल भी ख्याल नही है वह सिर्फ इसी सोच मे डूबा रहता है कि पैसा कैसे कमाऊ? दोस्तो गरूड पुराण के अनुसार जो व्यक्ति मोहमाया मे डूबा रहता है ईश्वर की कभी भक्ति नही करता उनकी कभी पूजा नही करता भूखो को भोजन तथा प्यासे को पानी नही पिलाता ऐसे लोग मृत्यु के पश्चात मोक्ष को नही प्राप्त करते है।

जो व्यक्ति बहुत ज्यादा पापी होता है मृत्यु के समय उसके प्राण बहुत कठिनाई से निकलते है यू समझ लीजिए कि ऐसे व्यक्तियों को मृत्यु के समय बडी दुर्गति होती है। मृत्यु के पश्चात इन्हे नर्क की घोर यातनाओं को सहना पडता है। यम के दूत ऐसी आत्माओ के गले मे रस्सी डालकर घसीटते हुये इन्हे यमराज के द्वार तक लेकर जाते है। यमराज के दूत ऐसे व्यक्तियो की आत्माओं को इतना मार मारते है कि वो बेहोश हो जाते है। जब होश आता है तब ये लोग दुख और पीडा से कराहते है चिल्लाते है अपने परिवार जनो को मदद के लिये पुकारते है लेकिन इनकी मदद करने वाला वहाँ कोई नही होता है।

नर्क की घोर यातनाओं को झेलने के पश्चात इन पापी तथा दुष्ट आत्माओं को यमराज 84 लाख योनियों मे भेज देते है। इन 84 लाख योनियों मे वह आत्मा गटर का कीटा, कुत्ता, सुअर, भेड, बकरी, सर्प, जोंक, चीटी, मधुमक्खी, अजगर, मच्छर ऐसे- ऐसे करते हुये 84 लाख योनियों मे इन आत्माओं को भटकना पडता है बडी तकलीफ होती है इन्हे। गरूड पुराण के अनुसार 84 लाख योनियों मे अंतिम योनि गाय की होती है।

इसके बाद वह आत्मा दोबारा मनुष्य के रूप मे इस संसार मे दोबारा जन्म लेती है। यदि आप फिर नही सुधरे और अपने जीवनकाल मे दोबारा आपने वही पाप कर्म को दोहराया तो याद रखना मृत्यु के पश्चात आपको दोबारा वही नर्क की यातनाओं को झेलना पडेगा। इसी तरह से आपको बार-बार इस दुनिया मे जन्म लेना पडेगा और दुखो को भोगना पडेगा।


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