महाभारत का युद्ध क्यो हुआ था जरूर जानें

महाभारत का युद्ध 22 नवम्बर 3067 ईसा पूर्व मे हुआ था। उस समय भगवान श्री कृष्ण 55 या 56 वर्ष के थे। कुछ विद्वानों के अनुसार महाभारत युद्ध के समय भगवान श्री कृष्ण की उम्र 83 वर्ष थी। महाभारत युद्ध के 36 वर्ष के बाद भगवान श्री कृष्ण ने अपनी देह का त्याग कर दिया था। इसका मतलब 119 वर्ष की आयु मे उन्होंने अपने देह का त्याग कर दिया। दोस्तो आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईसा पूर्व मे हुआ था। पुराणों के अनुसार श्री कृष्ण की आयु 125 वर्ष बताई गई थी।

जब कि ज्योतिष के मतानुसार उनकी आयु 110 वर्ष थी। ज्योतिष के अनुसार कलियुग के आरंभ होने से 6 माह पूर्व मार्गशीर्ष शुक्ल 14 को महाभारत का युद्ध आरंभ हुआ था जो कि 18 दिनो तक चला था। कलियुग का आरंभ श्री कृष्ण के निधन के 35 वर्ष बाद हुआ था। विद्वानों के अनुसार महाभारत मे वर्णित सूर्य और चन्द्र ग्रहण के अध्ययन से पता चलता है कि इसकी रचना 31वी सदी ईसा पूर्व मे हुई थी जब कि वर्तमान शोधकर्ताओं के अनुसार इसका रचनाकाल 1400 ईसा पूर्व का माना जाता है।

ब्रिटेन मे कार्यरत न्यूक्लियर मेडिसिन के फिजिशियन डाक्टर मनीष पंडित ने महाभारत मे वर्णित 150 खगोलीय घटनाओं के संदर्भ मे कहा कि महाभारत का युद्ध 22 नवम्बर 3067 ईसा पूर्व मे हुआ था उस समय भगवान श्री कृष्ण 55 या 56 वर्ष के थे। इसके कुछ माह के पश्चात महाभारत की रचना हुई मानी जाती है। शोधकर्ताओं के अनुसार वेदव्यास ने महाभारत को तीन चरणो मे लिखा है। पहले चरण मे 8800 श्लोक, दूसरे चरण मे 24000 और तीसरे चरण मे एक लाख श्लोक लिखे गये है। वेदव्यास की महाभारत के अलावा भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीट्यूट पुणे की संस्कृत महाभारत सबसे प्रमाणिक मानी जाती है।

महाभारत का युद्ध कहाँ तथा क्यो हुआ था-

 महाभारत का युद्ध कुरूक्षेत्र मे लडा गया था जो कि हरियाणा मे स्थित है। जब कुरू इस क्षेत्र की जुताई कर रहे थे तब इन्द्र ने उनसे जाकर इसका कारण पूछा तब कुरू ने कहा कि जो भी व्यक्ति इस स्थान पर मारा जाये वह पुण्य लोक मे जाये यही हमारी इच्छा है। इन्द्र उनकी इस बात को हँसी मे उडाते हुये स्वर्ग लोक चले गये लेकिन बाद मे उन्हे यह समझ मे आ गया कि ये बात भीष्म कृष्ण आदि सभी जानते थे इसीलिये महाभारत का युद्ध कुरूक्षेत्र मे लडा गया।

कुरूक्षेत्र मे कौरवों और पांडवों के बीच कुरू सम्राज्य के सिंहासन की प्राप्ति के लिये युद्ध लडा गया। कहा जाता है कि कौरव यदि पांडवों को पाँच गाँव दान दे देते तो युद्ध नही होता। दूसरा कारण यह है कि यदि कौरव और पांडव जुआ नही खेलते तो महाभारत का युद्ध न होता। महाभारत युद्ध का सबसे बडा कारण द्रौपदी का चीरहरण था। महाभारत युद्ध का तीसरा कारण है कि यदि द्रौपदी दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा न कहती तो द्रौपदी का चीरहरण न होता और न ही महाभारत का युद्ध होता।

महाभारत युद्ध के नियम-

भीष्म पितामह की सलाह पर दोनो दलो ने एकत्र होकर युद्ध के लिये कुछ नियम बनाये जो कि निम्नवत है।
  • महाभारत का युद्ध सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक ही चलेगा सूर्यास्त के पश्चात युद्ध नही होगा।
  • युद्ध की समाप्ति के पश्चात सभी लोग छल कपट छोडकर प्रेम से रहेंगे।
  • महाभारत युद्ध के नियमानुसार एक रथी दूसरे रथी से, हाथी वाला हाथी वाले से और पैदल वाला पैदल ही युद्ध करेगा।
  • एक वीर के साथ एक वीर ही युद्ध करेगा।
  • भय से भागते हुये या शरण मे आये हुये लोगो पर अस्त्र शस्त्र का प्रहार नही किया जायेगा।
  • जो वीर निहत्था हो जायेगा उस पर कोई भी अस्त्र नही उठाया जायेगा।
  • युद्ध मे सेवक का काम करने वालो पर कोई अस्त्र नही उठायेगा।

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