
भागवत कथा को संतो के द्वारा कहा जाता है। यदि देखा जाय तो संत पुण्यात्मा होते है। इनका जन्म मनुष्य जाति के उद्धार के लिये ही होता है ताकि ये लोग भूले भटको को जो अपने उद्देश्य से भटक चुके है उन्हे सही रास्ता दिखाना है। इन सभी का उद्देश्य इस धरती पर धर्म का प्रचार प्रसार करना है। दोस्तो भागवत कथा सात दिनो की कथा है। जो भी व्यक्ति ध्यान पूर्वक इस कथा को सुनता है उसके सभी पाप नष्ट हो जाते है। अंत मे उसे मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। दोस्तो इस महापुराण की इतनी अधिक महिमा है कि यदि कोई भी व्यक्ति कितना भी बडा पापी हो और मृत्यु के पश्चात प्रेतयोनि को प्राप्त हो जाय।
तो यदि आप उस व्यक्ति के नाम से भागवत कथा करवाते है तो निश्चित ही उस व्यक्ति की आत्मा को मोक्ष प्राप्त हो जायेगा। आपने धुंधकारी की कथा जरूर सुनी होगी। वह इतना अधिक पापी था कि मृत्यु के बाद उसे मोक्ष नही मिला बल्कि उसे प्रेतयोनि प्राप्त हुई वह प्रेत बनकर इधर उधर भटक रहा था। तब गोकर्ण ने अपने भाई धुंधकारी के नाम से भागवत कथा करवाई। जिससे धुंधकारी को प्रेतयोनि से मुक्ति मिल गई। फिर उसे लेने के लिये भगवान का विमान आया जिसमे भगवान के पार्सद बैठे हुये थे। भगवान के पार्सदो ने धुंधकारी को विमान के बिठाकर बैकुंठ धाम लेकर गये।