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गांधारी अपने पुत्र दुर्योधन को निर्वस्त्र क्यो देखना चाहती थी जरूर जानें

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
गांधारी को आप सभी लोग जरूर जानते होगें। गांधारी भगवान भोलेनाथ की बहुत बडी भक्त थी। एक बार गांधारी ने भगवान भोलेनाथ की बहुत कठिन तपस्या की। गांधारी की तपस्या से प्रसन्न भगवान भोलेनाथ ने गांधारी को यह वरदान दिया कि वह जिस किसी को भी अपने नेत्र की पट्टी खोलकर नग्नावस्था मे देखेगी उसका शरीर वज्रहो जायेगा।

गांधारी अपने पुत्र दुर्योधन को नग्नावस्था मे क्यो देखना चाहती थी-

महाभारत ग्रंथ के अनुसार गांधारी ने दुर्योधन से कहा कि मै तुम्हे विजयश्री का आशीर्वाद तो नही दूंगी लेकिन मै भगवान भोलेनाथ के भक्त हूँ मै तुम्हे एक कवच पहना सकती हूँ इसीलिये हे पुत्र तुम गंगा मे जाकर स्नान कर आओ और वहाँ से तुम्हे सीधे मेरे पास आना है किंतु तुम्हे ऐसे ही हमारे सामने आना है जैसे तुम जन्म के समय थे।

तब दुर्योधन ने अपनी माता गांधारी से कहा कि मुझे नग्नावस्था मे आपके समक्ष आना है तब माता गांधारी ने कि हाँ तुम्हे नग्नावस्था मे ही मेरे सामने आना है। तब दुर्योधन गंगा जी मे स्नान करने चला गया। जब दुर्योधन नग्नावस्था मे आ रहा था तब रास्ते मे दुर्योधन को श्री कृष्ण मिल गये उस समय दुर्योधन नग्नावस्था मे अपनी माता गांधारी की शिविर मे जा रहा था तब श्री कृष्ण दुर्योधन से कहते है कि क्या तुम अपनी माता के पास इस दशा मे जा रहे हो?

तब दुर्योधन श्री कृष्ण से कहता है कि माताश्री का यही आदेश है तब श्री कृष्ण कहते है कि वो तुम्हारी माता है और अब तुम वयस्क हो चुके हो क्या ऐसी स्थिति मे तुम्हे अपनी माता के समक्ष जाना सही होगा? यह कहकर श्री कृष्ण हंसते हुये वहाँ से चले गये। तब दुर्योधन सोच मे पड गया इसके बाद उसने अपने गुप्तांगों पर केले के पत्ते लपेटकर अपनी माता गांधारी के समक्ष गया और दुर्योधन अपनी माता गांधारी से कहता है कि माता मै आ गया। तब गांधारी अपने पुत्र दुर्योधन से कहती है कि मै क्षणभर के लिये अपनी आँखो पर से पट्टी खोलने जा रही हूँ।

मैने तुम्हारे भाइयों को तो नही देखा लेकिन आज तुम्हे देखूंगी। ऐसा कहकर गांधारी ने जैसे ही अपने आँखो की पट्टी हटाती है तो उनकी आँखो से प्रकाश निकलकर दुर्योधन के शरीर पर गिरता है बाद मे गांधारी देखती है कि दुर्योधन ने अपने गुप्तांग छुपा रखे है। तब गांधारी ने अपने पुत्र दुर्योधन से कहा कि पुत्र ये तुमने क्या कर दिया अपने गुप्तांग तुमने क्यो छुपा रखे है? तब दुर्योधन ने गांधारी से कहा कि माताश्री मै आपके समक्ष पूर्ण रूप से नग्नावस्था मे कैसे आ सकता था? तब गांधारी ने दुर्योधन से कहा कि मैने तुम्हे नग्नावस्था मे अपने समक्ष आने का आदेश दिया था।

यह कहकर वह दुखी होकर पुनः अपनी आँखो की पट्टी बाँध लेती है। उसके बाद गांधारी ने दुर्योधन से का कि पुत्र तुम्हारे शरीर का वह भाग जहाँ पर मेरी दृष्टि नही पडी है वह भाग दुर्बल रह गया है बाकि शरीर का शेष भाग वज्र हो गया है। यदि तुम बडो की आदेश मानने की परंपरा न भूलते तो आज तुम अजेय हो गये होते। यह सुनकर दुर्योधन अपनी माता गांधारी से कहता है कि यदि यह बात है तो मै अभी केले का पत्ता हटा देता हूँ तब गांधारी दुर्योधन से कहती है कि मै कोई मायावी नही हूँ।

मैने उस दृष्टि मे अपनी भक्ति, अपना सतित्व और अपनी ममता की सारी शक्ति मिला दी थी लेकिन अब ऐसा नही हो सकता। तब दुर्योधन अपनी माता गांधारी से कहता है कि कल मै भीम से युद्ध करूंगा और गदा युद्ध के नियमानुसार कमर के नीचे प्रहार करना वर्जित है कल मै उसे युद्ध मे पराजित कर दूँगा। अगले दिन महाभारत का युद्ध सूर्योदय के पश्चात प्रारंभ होता है भीम और दुर्योधन के बीच युद्ध होता है। भीम ने दुर्योधन की जंघा को उखाडकर उसका वध किया था।


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