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दिवाली के साथ बना सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
12 नवंबर दिन रविवार को दीपावली का पर्व मनाया जाएगा और इस दिन सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग भी बन रहा है। हर वर्ष दिवाली का पर्व कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है और इस दिन सुख समृद्धि और वैभव के लिए महालक्ष्मी और गणेशजी की पूजा अर्चना की जाती है। दिवाली के दिन सोमवती अमावस्या का होना बहुत शुभ माना गया है। इस दिन स्नान, ध्यान व दान करने से सौभाग्य में वृद्धि होती है। साथ ही पितरों के लिए पिंडदान, तर्पण विधि, दान व श्राद्ध किया जाता है। इस बार सोमवती अमावस्या पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जिससे इस दिन का महत्व काफी बढ़ गया है। आइए जानते हैं दिवाली के दिन बन रहे सोमवती अमावस्या में किस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करना शुभ लाभदायक रहेगा....

सोमवती अमावस्या का महत्व

सोमवती अमावस्या का व्रत रखने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है और सभी संकट दूर हो जाते हैं। इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना करनी चाहिए। लेकिन दिवाली के दिन सोमवती अमावस्या का संयोग बन रहा है तो आप लक्ष्मी, गणेश और कुबेर पूजन के साथ भगवान शिव की भी पूजन करना सौभाग्यदायक व मंगलकारी माना गया है। सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का ध्यान करते हुए पीपल की पूजा करना चाहिए। अगर संभव हो सके तो पूरे दिन भोजन में नमक का प्रयोग ना करें।

दिवाली पर सोमवती अमावस्या

दिवाली के दिन यानी 12 नवंबर को दोपहर के समय 2 बजकर 45 मिनट पर अमावस्या तिथि लग रहे है और अगले दिन 13 नवंबर दिन सोमवार को दोपहर 2 बजकर 57 मिनट पर अमावस्या तिथि का समापन हो रहा है। सोमवार और अमावस्या तिथि होने के कारण इस अमावस्या को सोमवती अमावस्या का संयोग बना है। शास्त्रों में बताया गया है कि सोमवार के दिन अमावस्या तिथि अगर थोड़ी देर के लिए ही लग जाती है तो उस अमावस्या को सोमवती अमावस्या माना जाएगा। दिवाली के दिन सोमवती अमावस्या का लगना बहुत शुभ फलदायी माना गया है। इस संयोग के बनने से महालक्ष्मी और गणेश के साथ भगवान शिव और माता पार्वती की भी कृपा प्राप्त होगी।

अमावस्या तिथि

सोमवती अमावस्या का प्रारंभ - 
12 नवंबर, दोपहर 2 बजकर 45 मिनट से
सोमवती अमावस्या का समापन - 13 नवंबर, 2 बजकर 57 मिनट तक
प्रदोष काल के समय लक्ष्मी पूजन करना शुभ माना जाता है इसलिए दिवाली का पर्व 12 नवंबर को मनाया जाएगा और उदया तिथि को मानते हुए सोमवती अमावस्या की पूजा, तर्पण व दान आदि कार्य 13 नवंबर को किए जाएंगे।

लक्ष्मी पूजन मुहूर्त

12 नवंबर दिन रविवार को शाम 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में लक्ष्मी पूजन करने से धन धान्य और सौभाग्य की प्राप्ति होती है और परिवार में सुख-शांति व समृद्धि बनी रहती है।

सोमवती अमावस्या पर शुभ योग

सोमवती अमावस्या पर सौभाग्य प्रदान करने वाला सौभाग्य योग, सभी कार्य पूर्ण करने वाला सर्वार्थ सिद्धि योग और सुख समृद्धि वाला शोभन योग भी बन रहा है। सोमवती अमावस्या के दिन इन शुभ योग का बनना बहुत दुर्लभ माना जा रहा है। सौभाग्य योग सुबह से लेकर दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। फिर शोभन योग प्रारंभ हो जाएगा, जो पूरे दिन रहने वाला है। वहीं सर्वार्थ सिद्धि योग 14 नवंबर की मध्यरात्रि 3 बजकर 23 मिनट से शुरू होकर 14 नवंबर की सुबह 6 बजकर 43 मिनट तक रहेगा।

ऐसे करें दीपावली पूजन

दीपावली पर सोमवती अमावस्या के शुभ संयोग का लाभ उठाने के लिए रात में पूजन करते समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा भी देवी लक्ष्मी और गणेशजी के साथ जरूर करें। वैसे आपको बता दें कि शास्त्रों में नियम है कि दीपावली की रात देवी लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु, काली के साथ शिवजी, सरस्वती देवी के साथ ब्रह्माजी की पूजा किया जाता है। गणेशजी और कुबेरजी की पूजा भी दीपावली रात में लक्ष्मीजी के साथ करनी चाहिए। ऐसा करने से स्थिर लक्ष्मी और धन समृद्धि का घर में आगमन होता है।



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