विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2023 को मनाई जाएगी। इसी के साथ पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 50 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक का शुभ मुहूर्त है।
विश्वकर्मा पूजा महत्व
ऋषियों-मुनियों ने ब्रह्मा, विष्णु और महेश के साथ विश्वकर्मा जी की पूजा आराधना का प्रावधान है। विश्वकर्मा जी को ही प्राचीन काल का पहला इंजीनियर माना जाता है। इस दिन औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े उपकर औजार, की पूजा की करने से कार्य में कुशलता आती है। साथ ही आपके कारोबार में बढ़ोतरी होती है। इतना ही नहीं आपके घर में धन धान्य और सुख समृद्धि का आगमन होता है।
विश्वकर्मा ने की थी पुष्पक विमान की रचना
विश्वकर्मा पुराण के अनुसार, नारायण ने सर्वप्रथम ब्रह्माजी और फिर विश्वकर्मा जी की रचना की थी। ब्रह्माजी के दिशा निर्देश के अनुसार, ही उन्होंने पुष्पक विमान की रचना की थी। इन सबके अलावा भगवान विश्वकर्मा को वास्तु शास्त्र का ज्ञान, यंत्र का निर्माण, विमान विद्या आदि के बारे में भी कई जानकारी प्राप्त हैं।
