आज पापांकुशा एकादशी है। इस तिथि पर भगवान विष्णु के शालग्राम रूप और श्रीकृष्ण की पूजा करने का विधान है। अगले दिन द्वादशी तिथि है। 15 जून, गुरुवार को द्वादशी का शुभ संयोग रहेगा। एकादशी पर तीन शुभ योग रहेंगे। इन दोनों दिनों में भगवान विष्णु की पूजा और व्रत-उपवास करना पुण्य फलदायी रहेगा।
तीन शुभ योगों में एकादशी व्रत
आज तीन शुभ योगों में एकादशी व्रत होगा। आज के सितारे वृद्धि, मानस और रवियोग बना रहे हैं। इन योगों में व्रत का संकल्प लेना शुभ रहेगा। सितारों की इस शुभ स्थिति में शुरू हुए व्रत का पुण्य दोगुना हो जाएगा। बुधवार को एकादशी होने का विशेष महत्व है। इस दिन एकादशी व्रत रखने से घर में सुख, शांति, समृद्धि आती है।
अश्विन द्वादशी पर विष्णु पूजन
अश्विन मास की द्वादशी पर सूर्योदय से पहले उठकर पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर नहाते हैं। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लिया जाता है। फिर व्रत रखकर भगवान विष्णु के वामन अवतार की पूजा करते हैं। पीपल में भी जल चढ़ाते हैं। दिनभर जरुरतमंद लोगों को दान किया जाता है। इस तिथि के स्वामी खुद भगवान विष्णु ही हैं। इसलिए द्वादशी तिथि पर इनकी विशेष पूजा करने का विधान है।
अश्विन मास के देवता हैं शालग्राम
स्कंद पुराण के मुताबिक अश्विन मास में भगवान विष्णु के शालग्राम अवतार को पूजने का विधान है। क्योंकि भगवान शालग्राम ही इस महीने के देवता हैं, इसलिए अश्विन मास की दोनों एकादशी और द्वादशी तिथियों पर भगवान शालग्राम की विशेष पूजा और व्रत करने की परंपरा है।
विष्णु धर्मोत्तर पुराण के मुताबिक अश्विन महीने के दौरान भगवान विष्णु के इस अवतार की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। संतान सुख मिलता है, जाने-अनजाने में हुए पाप और शारीरिक परेशानियां भी खत्म हो जाती हैं।