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गन्ने के मंडप तले तुलसी के साथ होगा शालिग्राम का विवाह

Updated on 01-01-1970 12:00 AM

 गुरूवार को कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी पर देवउठनी त्यौहार धूमधाम से मनाया जाएगा। पर्व को लेकर श्रद्धालुओं में उल्लास देखी जा रही है। बाजार में पूजा सामानों की खरीदारी के लिए रौनक बनी हुई है। शाम को शुभ मुहूर्त गन्ने के मंडप तले तुलसी और शालिग्राम की गठबंधन कर पूजा की जाएगी।

देवउठनी देवों के जागृत होने का पर्व है।ज्योतिष गणना के अनुसार गुरूवार को पूरे दिन एकादशी का योग है। विशेष तौर पर गृहस्थों के लिए उपवास रख कर एकादशी पूजन करना उत्तम पुलदायी होगा। यह एक ऐसा त्यौहार है, जिसके आयोजन के बाद वैवाहिक व अन्य मांगलिक कार्यों की शुरुआत हो जाती है। त्यौहार को लेकर बाजार में रौनकता देखते ही बन रही है।

त्यौहार में श्रद्धालु निर्जला उपवास रखकर भगवान शालिग्राम व तुलसी की पूजा करने का विधान है। त्यौहार में गन्ने का मंडपाच्छान कर तुलसी व शालिग्राम का गठबंधन कर हल्दी लेप कर विधि विधान से विवाह रचाई जाती है। विशेषता यह भी है कि वर्ष भर में होने वाले सभी एकादशी में देवउठनी को उत्तम माना जाता है। इस एकादशी महात्म्य की कथा सुनकर श्रद्धालु रात्रि जागरण कर भगवान विष्णु की आराधना करते हैं। देवउठनी व्रत को विधि विधान से करने पर सुखद दाम्पत्य जीवन के साथ परिवार में सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। देवउठनी पर्व के लिए पूजन व पुलाहारी सामान की खासी मांग देखी जा रही है। विशेष तौरपर शकरकंद, सिंघाड़ा, सेव, केला सहित अन्य मौसमी फुलों का उपयोग किया जाता है।

जिले के बाजारों में पूजन सामग्रियों सहित जगह-जगह गन्ने, सिंघाड़ा व शंकरकंद की खेप उतरने लगी है। सरगुजा, शिवरीनारायण आदि क्षेत्रों से गन्ना शहर के बाजारों में पहुंच रही है। बाजार गन्ना 30 रूपये प्रति नग बिक्री किया जा रहा है। इसी तरह शकरकंद 50 से 60 रूपए प्रति किलो व सिंघाड़ा 40 से 50 रूपये की प्रति किलो दर पर बेचे जा रहे हैं।

पहले दिन से ही विवाह का मुहूर्त

देवउठनी एकादशी के साथ विवाह कार्यों की शुरुआत हो जाती है, इस बार देवउठनी एकादशी पर पहले दिन से ही मुहूर्त की शुरूआत हो रही है। ज्योतिषाचार्य दशरथ नंदन शास्त्री ने बताया कि नवंबर माह में 24, 27, 28 व 29 को शुभ संयोग है। यह संयोग आगामी माह दिसंबर के पहले पखवाड़े तक रहेगा। सूर्य का धनु राशि में प्रवेश कारण 17 दिसंबर को खर माह की शुरूआत हा रही है। इसकी अवधि 15 जनवरी तक रहेगी। इस अवधि में मांगलिक कार्य विवाह आदि वर्जित रहेगा। 16 जनवरी को खर माह की समाप्ति के बाद लग्न की भरमार देखी जा रही है।

क्या है धार्मिक मान्यता

धार्मिक कथा के अनुसार महासती वृंदा दैत्यराज जालंधर की पत्नी थी। जालंधर बहुत ही अत्याचारी दानव था, किंतु वृंदा के सतित्व के कारण देवता भी उसका बाल बांका नहीं कर सकते थे। धर्म की रक्षा के लिए विष्णु ने सती से छल किया। जिससे जालंधर का वध हुआ। सती ने विष्णु को शाप दे दिया जिससे वह पाषाण हो गए। लक्ष्मी के आग्रह पर तुलसी ने विष्णु को यथावत कर दिया। भगवान ने तुलसी के सतीत्व से प्रसन्न होकर तुलसी पौधे के रूप में उत्पन्न होने का वरदान दिया व कहा कि तुलसी के बगैर विष्णु पूजा अधूरा है। इसी दिन की याद में तुलसी विवाह आयोजित किया जाता है।

सोना-चांदी, भवन-वाहन खरीदी शुभ

मुताबिक इस दिन सोने-चांदी की खरीदी लाभकारी होगी। यह अबूझ मुहूर्त रहेगा और ऐसे में भूमि, भवन और वाहन की खरीदी भी की जा सकती है। कहते हैं कि देवउठनी एकादशी व्रत का पारण करने के बाद ब्राह्म्ण का भोजन कराना लाभदायक होता है। इसके साथ ही उन्हें कुछ दक्षिणा भी दी जाती है। इसके अलावा अन्न का दान सबसे महत्वपूर्ण माना गया है। कहते हैं कि देवउठनी एकादशी के दिन धान, गेहूं, मक्का, बाजरा, उड़द, गुड़ का दान करना शुभ होता है। इसके अलावा वस्त्र का भी दान किया जाता है। इस एकादशी के दिन सिंघाड़ा, शकरकंदी, गन्ना और सभी मौसमी फलों का दान करना महत्वपूर्ण व लाभकारी माना गया है। इससे भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।


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