
अगहन महीने का शुक्ल पक्ष 13 दिसंबर, बुधवार से शुरू हो रहा है। जो कि 26 दिसंबर तक रहेगा। इस दौरान 23 दिसंबर को द्वादशी तिथि का क्षय होगा। यानी एक तिथि कम होने से ये पखवाड़ा 14 दिनों का ही रहेगा। इस शुक्ल पक्ष में तीज-त्योहारों के 6 दिन रहेंगे।
श्रीकृष्ण का प्रिय महीना
मार्गशीर्ष यानी अगहन महीना पवित्र माना जाता है। ये श्रीकृष्ण को बहुत प्रिय है। शास्त्रों में इसे श्रीकृष्ण का स्वरूप कहा गया है। हिंदू पंचांग के मुताबिक मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में धनुर्धारी अर्जुन को गीता का उपदेश सुनाया था।
गीता के एक श्लोक में श्रीकृष्ण मार्गशीर्ष मास की महिमा बताते हुए कहते हैं कि गायन करने योग्य श्रुतियों में मैं बृहत्साम, छंदों में गायत्री और मास में मार्गशीर्ष और ऋतुओं में बसंत हूं। शास्त्रों में मार्गशीर्ष का महत्व बताते हुए कहा गया है कि हिन्दू पंचांग के इस पवित्र मास में गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करने से रोग, दोष और परेशानियों से मुक्ति मिलती है।
अगहन महीने के शुक्ल पक्ष में आने वाले तीज-त्योहार...
16 दिसंबर, शनिवार: इस दिन सूर्य राशि परिवर्तन करेगा। वृश्चिक से निकलकर धनु राशि में आने से इस दिन धनु संक्रांति पर्व मनेगा। इस पर्व पर तीर्थ स्नान और दान से कई गुना पुण्य फल मिलता है। इस दिन से धनुर्मास भी शुरू हो जाएगा।
17 दिसंबर, रविवार: इस दिन विवाह पंचमी है। त्रेतायुग में इसी तिथि पर श्रीराम और सीता का विवाह हुआ था। इस दिन श्रीराम और सीता की विशेष पूजा करें। रामायण का पाठ करें।
18 नवंबर, सोमवार: इस दिन चंपा षष्ठी व्रत रहेगा। इसमें भगवान शिव और कार्तिकेय की पूजा की जाती है। स्कंद पुराण के मुताबिक इस दिन कार्तिकेय पूजा से परेशानियां दूर होती हैं।
23 दिसंबर, शनिवार: इस दिन मोक्षदा एकादशी है। इस दिन व्रत के साथ श्रीकृष्ण और भगवान विष्णु की विशेष पूजा की जाती है। साथ ही इस दिन गीता जयंती पर्व भी मनाया जाता है। इस पर्व पर नदी में स्नान करने और दान-पुण्य करने की परंपरा है।
24 दिसंबर, रविवार: ये साल का आखिरी रवि प्रदोष है। रविवार को त्रयोदशी का संयोग होने से इस दिन भगवान शिव-पार्वती के साथ सूर्य पूजा से सुख और समृद्धि बढ़ती है। ये व्रत सभी दोष दूर करता है।
26 दिसंबर, मंगलवार: इस दिन मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा तिथि है। ये इस हिंदी महीने का आखिरी दिन रहेगा। अगहन महीने के इस पूर्णिमा पर्व पर स्नान-दान और पूजा-पाठ करने की परंपरा है। इस दिन दत्तात्रेय भी जयंती है। इस तिथि पर ऋषि अत्रि और सति अनसूया के बेटे के रूप में त्रिदेवों के अंश दत्तात्रेय का जन्म हुआ था।