पंचांग के अनुसार कार्तिक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 5 नवंबर को रात 12.59 बजे शुरू होगी और अगले दिन यानी 6 नवंबर को रात 3.18 बजे समाप्त होगी। साधक 5 नवंबर को दिन में किसी भी समय काल भैरव देव की पूजा कर सकते हैं।
कार्तिक कालाष्टमी तिथि पर ब्रह्म बेला में उठ जाएं। इसके बाद घर की साफ-सफाई करें। अपने दैनिक कार्य समाप्त करने के बाद गंगाजल युक्त जल से स्नान करें। आचमन कर, व्रत करने का संकल्प लें। निशा काल में काल भैरव देव की पूजा की जाती है। इसलिए रात्रि में भी पूजा करनी चाहिए। साथ ही कालाष्टमी पर दिन में भी महाकाल की पूजा-अर्चना करते की जा सकती है।
इस समय पंचोपचार करें और फल, फूल, बिल्व पत्र, धतूरा, फल, धूप दीप, दूध, दही आदि से काल भैरव देव की पूजा करें। पूजा के दौरान शिव चालीसा, भैरव कवच का पाठ करें और मंत्र जाप करें। मंत्र। पूजा के अंत में आरती करें और भगवान से सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूरे दिन निराहार रहें। रात्रि के समय स्नान ध्यान करें और फिर विधि-विधान से पूजा और आरती करें। इसके बाद फलाहार करें।
सनातन धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। इस माह में गंगा स्नान की परंपरा है। इसलिए कार्तिक माह में बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान करते हैं। इस मौके पर मंदिरों को भी भव्य तरीके से सजाया जाता है। कार्तिक कालाष्टमी पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा स्नान कर, महाकाल की पूजा करते हैं।