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भीष्म पितामह को बाणो की सैय्या पर क्यो लेटना पडा।

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
आप सभी भीष्म पितामह के बारे मे अच्छी तरह से जानते होगें ये माँ गंगा के पुत्र थे। ये बडे ही धार्मिक प्रवृत्ति के थे। इसके बावजूद भी इन्हे मृत्यु के समय बाणो की सैय्या मिला। एक महापुरुष होने के बावजूद इन्हे इतना बडा कष्ट झेलना पडा। इनके पूरे शरीर मे बाण ही बाण घुसे हुये थे। यह सब इनके पूर्व जन्म के पाप का नतीजा था। दोस्तो सबसे बडी खासियत इनमे यह थी कि इनकी मृत्यु स्वयं इन्ही के हाथ मे थी। बाणो की सैय्या पर होने के बावजूद इनके प्राण इनके शरीर से नही निकल रहे थे। इन्होंने अपनी इच्छा से सूर्योदय के समय अपने प्राण त्यागे। आज हम आपको बतायेंगे कि भीष्म पितामह को बाणो की सैय्या कैसे मिली।

भीष्म पितामह को बाणो की सैय्या पर क्यो लेटना पडा-

दोस्तो आप  सभी भीष्म पितामह के बारे मे अच्छी तरह से जानते होगे। ये माँ गंगा की आठवीं संतान थे। भीष्म पितामह को इच्छामृत्यु का वरदान प्राप्त था। महाभारत के युद्ध मे अर्जुन ने भीष्म पितामह के शरीर को बाणो से छलनी कर दिया था। अर्जुन ने भीष्ण पितामह को इतने बाण मारे की भीष्म पितामह उसी बाणो की सैय्या पर लेट गये और दर्द के मारे कराहने लगे। तब भीष्म पितामह ने भगवान श्री कृष्ण से पूछा कि हे माधव मैने ऐसा कौन सा पाप कर्म किया था जिसकी वजह से मुझे बाणो की सैय्या मिली।

मैने तो आज तक कोई पाप नही किया जिसकी वजह से मुझे ऐसी मृत्यु मिले। तब भगवान श्री कृष्ण कहते है कि हे भीष्म पितामह आपने पूर्व जन्म मे एक सांप को नागफनी पर फेक दिया था जिसकी वजह से उसके पूरे शरीर मे कांटे ही कांटे धस गये थे तथा वह लहूलुहान हो गया था और तडप-तडप कर उसकी मृत्यु हो गई जिसके पाप के भागीदार आप हुये। यही कारण है कि आपको इस जन्म मे बाणों की सैय्या मिली है। जिस तरह से उस सांप को तकलीफ हुई थी ठीक उसी तरह से आज आपको तकलीफ हो रही है।

तब भीष्म पितामह को अपनी गलती का ऐहसास हुआ। भीष्म पितामह का पूरा शरीर छलनी होने के बावजूद भी उन्होंने अपने प्राण नही त्यागे क्योंकि उस समय सूर्य दक्षिणायन मे चल रहे थे। धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस व्यक्ति की मृत्यु दक्षिणायन मे होती है उसे मरने के बाद नर्क की प्राप्ति होती है इसीलिये भीष्म पितामह इस गहन पीडा को सहते रहे और सूर्य के उत्तरायण होने के बाद ही इन्होने अपने प्राण का त्याग किया।



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