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देश के प्रसिद्ध लक्ष्मी मंदिर, दर्शन करने वालों पर होती है विशेष कृपा

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
हमारे यहां शव, राम, कृष्ण, हनुमान और शनिदेव के मंदिर बहुतायत में हैं। इसके अलावा यहां अन्य देवी-देवताओं के भी मंदिर हैं, लेकिन उनकी संख्या इतनी अधिक नहीं है। दिवाली पर देवी लक्ष्मी की पूजा मुख्य रूप से उत्तर भारत में की जाती है। वैसे तो घरों और प्रतिष्ठानों में पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन कई लोग सुबह-सुबह मंदिर भी जाते हैं। हमारे देश में लक्ष्मी के कई प्रसिद्ध मंदिर हैं। जानिए प्रमुख लक्ष्मी मंदिरों के बारे में -

अष्टलक्ष्मी मंदिर, चेन्नई: यह मंदिर इलियट बीच के पास स्थित है। यह मंदिर देवी लक्ष्मी के आठ रूपों - वंश, सफलता, समृद्धि, धन, साहस, वीरता, भोजन और ज्ञान को समर्पित है। मंदिर में 4 मंजिलों में फैले 8 अलग-अलग कमरों में देवी लक्ष्मी के आठ रूप स्थापित हैं। लक्ष्मी कुबेर मंदिर, वडालूर, चेन्नई चेन्नई के वडालूर नामक क्षेत्र में एक अनोखा मंदिर है। यह मंदिर अनोखा है क्योंकि इस मंदिर में भगवान कुबेर और देवी लक्ष्मी एक साथ मौजूद हैं।

लक्ष्मी नारायण मंदिर, वेल्लोर: इस मंदिर के निर्माण में लगभग 15,000 किलोग्राम शुद्ध सोने का उपयोग किया गया था। यह स्वर्ण मंदिर तमिलनाडु राज्य के वेल्लोर शहर से 7 किलोमीटर दूर थिरुमलाई कोडी में स्थित है। यह मंदिर 24 अगस्त 2007 को दर्शन के लिए खोला गया था।

महालक्ष्मी मंदिर, मुंबई: समुद्र तट पर स्थित यह मंदिर समुद्र की वजह से बेहद खूबसूरत और आकर्षक लगता है। मंदिर में कई देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। मान्यता है कि एक ठेकेदार के सपने में माता ने दर्शन दिए और उसे तीनों मूर्तियां समुद्र से निकालकर स्थापित करने को कहा। मुंबई के महालक्ष्मी मंदिर में वही तीन मूर्तियाँ महालक्ष्मी, महाकाली और महासरस्वती के रूप में स्थापित हैं।

लक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर: कोल्हापुर में देवी लक्ष्मी को अम्बाजी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में 7वीं शताब्दी में चालुक्य शासक कर्णदेव ने करवाया था। इसकी खासियत यह है कि इस मंदिर में सूर्य की किरणें मां की मूर्ति पर पड़ती हैं।

अष्टलक्ष्‍मी मंदिर, हैदराबाद: हैदराबाद के बाहरी इलाके में अष्‍टलक्ष्‍मी नाम से देवी लक्ष्‍मी का मंदिर है। यह मंदिर दक्षिण भारत की स्थापत्य कला के आधार पर बनाया गया है। इस मंदिर को 1996 में भक्तों के लिए खोला गया था। यह मंदिर अपने आप में खास है क्योंकि यहां देवी 8 अलग-अलग रूपों में मौजूद हैं।

लक्ष्मी नारायण मंदिर, जयपुर: बिड़ला परिवार ने देशभर में कई मंदिर बनवाए हैं। जयपुर का यह मंदिर उनमें से एक है। इस मंदिर का निर्माण 1988 में हुआ था। विशाल परिसर में बना यह संगमरमर का मंदिर बेहद खूबसूरत है। यह मंदिर मुख्यतः दक्षिणी शैली में बना हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान लक्ष्मी नारायण की अत्यंत सुंदर मूर्ति स्थापित है।

लक्ष्मी नारायण मंदिर, दिल्ली: इसे दिल्ली का बिड़ला मंदिर भी कहा जाता है। यह मंदिर भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को समर्पित है। यह मंदिर मूल रूप से 1622 में वीर सिंह देव द्वारा बनाया गया था और 1793 में पृथ्वी सिंह द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था। बाद में, 1938 में, बिड़ला समूह द्वारा इसका विस्तार और नवीनीकरण किया गया, जिसका उद्घाटन तब महात्मा गांधी ने किया था।

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