Select Date:

कहानी भारत के एक ऐतिहासिक मंदिर की, जिसकी बनावट नहीं है किसी अजूबे से कम

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
हिंदू धर्म में भगवान और मंदिरों का बड़ा महत्व है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान ही इस सृष्टि का संचालन करते हैं। उनकी ही इच्छा से धरती पर सबकुछ होता है। वैसे तो हिंदू धर्म की मान्यता है कि भगवान हर जगह मौजूद हैं, लेकिन भारत की संस्कृति ऐसी है कि यहां जगह-जगह आपको अलग-अलग देवताओं के मंदिर मिल जाएंगे। ऐसा सदियों से चला आ रहा है कि लोग अपनी श्रद्धा से मंदिरों का निर्माण करवाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही एक मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जो किसी अजूबे से कम नहीं है। कहते हैं कि इस मंदिर को बनने में 100 साल से भी ज्यादा का समय लगा था और इसके निर्माण में करीब 7000 मजदूरों लगाए गए थे।

दरअसल, यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में स्थित एलोरा की गुफाओं में है, जिसे एलोरा के कैलाश मंदिर के नाम से जाना जाता है।

276 फीट लंबे और, 154 फीट चौड़े इस मंदिर की खासियत ये है कि इसे केवल एक ही चट्टान को काटकर बनाया गया है। ऊंचाई की अगर बात करें तो यह मंदिर किसी दो या तीन मंजिला इमारत के बराबर है। इस भव्य मंदिर को देखने के लिए सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि दुनियाभर से लोग आते हैं।

कहा जाता है कि इस मंदिर के निर्माण में करीब 40 हजार टन वजनी पत्थरों को काटा गया था। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसका रूप हिमालय के कैलाश की तरह देने का प्रयास किया गया है। कहते हैं कि इसे बनवाने वाले राजा का मानना था कि अगर कोई इंसान हिमालय तक नहीं पहुंच पाए तो वो यहां आकर अपने अराध्य भगवान शिव का दर्शन कर ले।

इस मंदिर का निर्माण कार्य मालखेड स्थित राष्ट्रकूट वंश के नरेश कृष्ण (प्रथम) (757-783 ई.) ने शुरु करवाया था। माना जाता है कि इसे बनाने में 100 साल से भी ज्यादा का समय लगा था और करीब 7000 मजदूरों ने दिन-रात एक करके इस मंदिर के निर्माण में अपना योगदान दिया था।

स मंदिर में आज तक कभी पूजा हुई हो, इसका प्रमाण नहीं मिलता। यहां आज भी कोई पुजारी नहीं है। यूनेस्को ने 1983 में ही इस जगह को 'विश्व विरासत स्थल' घोषित किया है।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 January 1970
केदारनाथ धाम 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से सैलानियों के बीच अत्यधिक प्रसिद्ध हो चुका (Kedarnath Temple Story In Hindi) है। हालाँकि धार्मिक रूप से इसकी मान्यता पहले जैसी…
 01 January 1970
राजस्थान के बीकानेर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर करणी माता को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 20वी शताब्दी में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था।ऐसा माना…
 01 January 1970
 हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी हरसिद्धि की आराधना के महत्व के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। देश में वैसे तो देवी हरसिद्धि के कई मंदिर हैं, लेकिन वाराणसी…
 01 January 1970
शक्तिपीठों की यात्रा के भाग 7 में आज हम आए हैं पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित हिंगलाज माता मंदिर। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह हिंगोल…
 01 January 1970
शक्तिपीठों की यात्रा के नौवें पड़ाव में आज हम आए हैं नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3-4 किमी की दूरी पर स्थित श्री गुह्येश्वरी शक्तिपीठ। इस मंदिर को गुहेश्वरी और…
 01 January 1970
बिहार के कैमूर जिले में मां मुंडेश्वरी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में कैमूर पर्वतश्रेणी की पवरा पहाड़ी…
 01 January 1970
हिंदू धर्म में भगवान और मंदिरों का बड़ा महत्व है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान ही इस सृष्टि का संचालन करते हैं। उनकी ही इच्छा से धरती पर…
 01 January 1970
विजय राठौड़/ग्वालियर. गालव ऋषि की तपोस्थली कहे जाने वाला ग्वालियर सदैव से ही लोगों के बीच धार्मिक मान्यताओं और आस्था का केंद्र रहा है. जाने कितने ही संतो ने तप कर…
 01 January 1970
वेद काल में न तो मंदिर थे और न ही मूर्ति। वैदिक समाज इकट्ठा होकर एक ही वेदी पर खड़े रहकर ब्रह्म (ईश्वर) के प्रति अपना समर्पण भाव व्यक्त करते…
Advt.