विजय राठौड़/ग्वालियर. गालव ऋषि की तपोस्थली कहे जाने वाला ग्वालियर सदैव से ही लोगों के बीच धार्मिक मान्यताओं और आस्था का केंद्र रहा है. जाने कितने ही संतो ने तप कर इस स्थल को कपू स्थल का नाम दिया है. इतना ही नहीं ऋषियों की ओर से की गई कठोर तपस्या के प्रमाण आज भी किसी ना किसी स्वरूप में देखने को मिलते हैं.
ऐसा ही एक प्रमाण ग्वालियर दुर्ग की पैदल चढ़ाई के समय मिलता है. जिसे सभी सिद्ध बाबा के मंदिर के नाम से जानते हैं. यह स्थल देखने में जितना सुंदर है उतना ही लोगों की आस्था भी इस स्थान से जुड़ी हुई हैं. कई सालों से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं. कई लोगों की सुबह ही इस मंदिर पर दर्शन के साथ होती है. वहीं कई बुजुर्ग अपने सुकून के पल इस मंदिर के शांत वातावरण में गुजारने पसंद करते हैं.
विजय राठौड़/ग्वालियर. गालव ऋषि की तपोस्थली कहे जाने वाला ग्वालियर सदैव से ही लोगों के बीच धार्मिक मान्यताओं और आस्था का केंद्र रहा है. जाने कितने ही संतो ने तप कर इस स्थल को कपू स्थल का नाम दिया है. इतना ही नहीं ऋषियों की ओर से की गई कठोर तपस्या के प्रमाण आज भी किसी ना किसी स्वरूप में देखने को मिलते हैं.
ऐसा ही एक प्रमाण ग्वालियर दुर्ग की पैदल चढ़ाई के समय मिलता है. जिसे सभी सिद्ध बाबा के मंदिर के नाम से जानते हैं. यह स्थल देखने में जितना सुंदर है उतना ही लोगों की आस्था भी इस स्थान से जुड़ी हुई हैं. कई सालों से लोग यहां दर्शन के लिए आते हैं. कई लोगों की सुबह ही इस मंदिर पर दर्शन के साथ होती है. वहीं कई बुजुर्ग अपने सुकून के पल इस मंदिर के शांत वातावरण में गुजारने पसंद करते हैं.
बेहद प्राचीन है सिद्धबाबा का यह मंदिर
ग्वालियर दुर्ग की पैदल चढ़ाई शुरू होने के बाद जब आप पहले पड़ाव पर पहुंचते हैं. वहां गणेश द्वार में प्रवेश करने के बाद, आपको दाहिने हाथ पर एक गोमती और प्राचीन गुफाओं का संकलन देखने को मिलेगा. यह स्थान सिद्ध बाबा की तपोस्थली के नाम से भी जाना जाता है. कहा जाता है कि यहां पर बाबा तप किया करते थे. वही गालव ऋषि भी यहां पर किसी समय में आया करते थे. जिन्होंने यहां पर मौजूद गुफाओं में बैठकर तपस्या भी की थी. स्थानीय लोगों की माने तो यहां पर कई वर्षों पूर्व जो संत हुआ करते थे, वह सिद्ध बाबा के नाम से प्रचलित थे. जिनके पास कई दिव्य और ध्यान शक्तियां थी जो लोगों को प्रभावित करती थी.
तपस्थली गुफा तक पहुंचने का रास्ता कठिन
इस मंदिर में जहां एक तरफ श्री हनुमान विराजमान है तो वहीं दूसरी तरफ बेहद प्राचीन गुफाएं भी हैं. जिनमें से एक गुफा में तो आज भी लोग सिद्ध बाबा के दर्शन करते हैं. लेकिन दूसरी गुफा जिसे सिद्ध बाबा की तपस्थली कहा जाता था. वहां तक पहुंचने का मार्ग बेहद कठिन है. बेहद मुश्किल से साल में एक बार झंडा बदलने के लिए उस स्थान पर जाते है. लेकिन कहा जाता है कि बाबा वही पूजा पाठ किया करते थे.
आज भी होता है विशाल भंडारा और आयोजन
बीते 25 सालों से सिद्ध बाबा के दर्शन के लिए आने वाले गिरीश संदल ने बताया कि यह बेहद प्राचीन मंदिर है. यहां सिद्ध बाबा नाम के एक संत रहते थे, जो यहां पर तपस्या भी किया करते थे. उन्होंने बताया कि लोगों को इस मंदिर से गहरी आस्था है. अपना ही उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि जब भी मैंने कभी यहां सच्चे मन से कोई मनोकामना मांगी है, तो वह अवश्य पूरी होती है. यदि सच्चे मन से कोई इस मंदिर पर मुराद मांगता है, तो बाबा उसकी मुराद जरूर पूरी करते हैं. दशहरा के अवसर पर बड़े धार्मिक आयोजन के साथ-साथ विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है. जिसकी प्रसादी लेने के लिए शहर के कोने-कोने से लोग आते हैं.