Select Date:

सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि है उज्जैन का हरसिद्धि मंदिर, रोचक है इसका इतिहास

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
 हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी हरसिद्धि की आराधना के महत्व के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। देश में वैसे तो देवी हरसिद्धि के कई मंदिर हैं, लेकिन वाराणसी और उज्जैन में स्थित हरसिद्धि मंदिर का विशेष पौराणिक महत्व है। पंडित चंद्रशेखर मलतारे इस लेख में उज्जैन के हरसिद्धि के धार्मिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दे रहे हैं।

सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि

पंडित चंद्रशेखर मलतारे के मुताबिक, उज्जैन स्थित महाकाल क्षेत्र में जो हरसिद्धि मंदिर है, वह काफी प्राचीन है और उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर को ही सम्राट विक्रमादित्य की तपोभूमि माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि देवी हरसिद्धि को प्रसन्न करने के लिए सम्राट विक्रमादित्य ने इस स्थान पर 12 वर्ष तक कठिन तप किया था और हर वर्ष अपने हाथों में अपने मस्तक की बलि दी थी। बलि देने के बाद हर बार उनका मस्तक वापस आ जाता था। 12वीं बार जब मस्तक वापस नहीं आया तो समझा गया कि उनका शासन अब पूर्ण हो चुका है।

उज्जैन की रक्षा करती है देवी हरसिद्धि

एक धार्मिक मान्यता यह भी है कि उज्जैन की रक्षा के लिए आसपास कई देवियां है, उनमें से एक देवी हरसिद्धि भी है। धार्मिक मान्यता है कि इस स्थान पर सती के शरीर से अलग होने के बाद हाथ की कोहनी गिरी थी और इस कारण इस स्थान को शक्तिपीठ के अंतर्गत माना जाता है। पौराणिक ग्रंथों में भी उज्जैन के हरसिद्धि मंदिर का उल्लेख मिलता है। उज्जैन में दो शक्तिपीठ माने जाते हैं। पहला हरसिद्धि माता और दूसरा गढ़कालिका माता का शक्तिपीठ।

हरसिद्धि मंदिर में है चार प्रवेशद्वार

उज्जैन स्थित देवी हरसिद्धि मंदिर में 4 प्रवेशद्वार हैं। इस मंदिर का प्रवेश द्वार पूर्व दिशा की तरफ है। मंदिर के दक्षिण-पूर्व के कोण में एक बावड़ी बनी हुई है, जिसके अंदर एक स्तंभ है। यहां श्री यंत्र बना हुआ स्थान है। हर साल नवरात्रि के दौरान 5 दिन स्तंभ में दीप जलाएं जाते हैं। शक्तिपीठ होने के कारण इस मंदिर का विशेष महत्व है।

डिसक्लेमर

'इस लेख में दी गई जानकारी/सामग्री/गणना की प्रामाणिकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं है। सूचना के विभिन्न माध्यमों/ज्योतिषियों/पंचांग/प्रवचनों/धार्मिक मान्यताओं/धर्मग्रंथों से संकलित करके यह सूचना आप तक प्रेषित की गई हैं। हमारा उद्देश्य सिर्फ सूचना पहुंचाना है, पाठक या उपयोगकर्ता इसे सिर्फ सूचना समझकर ही लें। इसके अतिरिक्त इसके किसी भी तरह से उपयोग की जिम्मेदारी स्वयं उपयोगकर्ता या पाठक की ही होगी।'



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 January 1970
केदारनाथ धाम 2013 में आई प्राकृतिक आपदा के बाद से सैलानियों के बीच अत्यधिक प्रसिद्ध हो चुका (Kedarnath Temple Story In Hindi) है। हालाँकि धार्मिक रूप से इसकी मान्यता पहले जैसी…
 01 January 1970
राजस्थान के बीकानेर में स्थित यह प्रसिद्ध मंदिर करणी माता को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण 20वी शताब्दी में बीकानेर रियासत के महाराजा गंगा सिंह ने करवाया था।ऐसा माना…
 01 January 1970
 हिंदू धर्म ग्रंथों में देवी हरसिद्धि की आराधना के महत्व के बारे में विस्तार से उल्लेख मिलता है। देश में वैसे तो देवी हरसिद्धि के कई मंदिर हैं, लेकिन वाराणसी…
 01 January 1970
शक्तिपीठों की यात्रा के भाग 7 में आज हम आए हैं पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित हिंगलाज माता मंदिर। ये मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है। यह हिंगोल…
 01 January 1970
शक्तिपीठों की यात्रा के नौवें पड़ाव में आज हम आए हैं नेपाल की राजधानी काठमांडू से 3-4 किमी की दूरी पर स्थित श्री गुह्येश्वरी शक्तिपीठ। इस मंदिर को गुहेश्वरी और…
 01 January 1970
बिहार के कैमूर जिले में मां मुंडेश्वरी का एक अनोखा और प्राचीन मंदिर स्थित है। यह मंदिर बिहार के कैमूर जिले के भगवानपुर अंचल में कैमूर पर्वतश्रेणी की पवरा पहाड़ी…
 01 January 1970
हिंदू धर्म में भगवान और मंदिरों का बड़ा महत्व है। क्योंकि ऐसा माना जाता है कि भगवान ही इस सृष्टि का संचालन करते हैं। उनकी ही इच्छा से धरती पर…
 01 January 1970
विजय राठौड़/ग्वालियर. गालव ऋषि की तपोस्थली कहे जाने वाला ग्वालियर सदैव से ही लोगों के बीच धार्मिक मान्यताओं और आस्था का केंद्र रहा है. जाने कितने ही संतो ने तप कर…
 01 January 1970
वेद काल में न तो मंदिर थे और न ही मूर्ति। वैदिक समाज इकट्ठा होकर एक ही वेदी पर खड़े रहकर ब्रह्म (ईश्वर) के प्रति अपना समर्पण भाव व्यक्त करते…
Advt.