कार्तिक पूर्णिमा (27 नवंबर) पर सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव जी की जयंती है। गुरुनानक शिष्यों के साथ यात्रा करते करते थे। इस दौरान वे अपने उपदेशों से और अपने आचरण से लोगों को सुखी जीवन के सूत्र भी बताते थे। कभी-कभी वे ऐसी बातें कह देते थे, जो शिष्यों को आसानी से समझ नहीं आती थीं। गुरुनानक के छोटे-छोटे शब्दों का अर्थ बहुत गहरा होता था। जानिए एक ऐसा किस्सा, जिसमें गुरुनानक ने छोटे शब्दों में बड़ी बात शिष्यों को समझाई थी...
एक बार गुरु नानक अपने शिष्यों के साथ यात्रा करते हुए एक ऐसे गांव में पहुंचे। गुरु नानक के आने की सूचना पाकर गांव के लोग उनके दर्शन करने पहुंच गए। उस समय गुरु नानक ने लोगों के एक समूह को आशीर्वाद दिया कि बस जाओ यानी यहीं रहो।
कुछ देर बाद एक दूसरा समूह आया तो गुरुनानक ने उन्हें कहा कि उजड़ जाओ यानी बिखर जाओ।
जब लोग चले गए तो शिष्यों ने गुरुनानक से पूछा कि आपने ये कैसे आशीर्वाद दिए हैं? एक समूह को आपने कहा है बस जाओ और दूसरे समूह को कहा है कि उजड़ जाओ।
गुरुनानक ने शिष्यों को समझाते हुए कहा कि लोगों का जो पहला समूह आया था, उसके लोग अच्छे नहीं थे। वे बुरे कामों में लगे रहते हैं। गलत लोग एक ही जगह सीमित रहें तो समाज के लिए अच्छा है। बुराई एक जगह रहेगी तो समाज में नहीं फैलेगी। इसीलिए, मैंने उन्हें यहीं बस जाने का आशीर्वाद दिया।
गुरुनानक ने आगे कहा कि जो लोग दूसरे समूह में आए थे, वे सभी बहुत अच्छे थे, संस्कारी थे, दानी थे, इसलिए मैंने उन्हें उजड़ जाने का आशीर्वाद दिया, ताकि वे जहां जाएंगे अपनी अच्छाई फैलाएंगे और समाज का भला करेंगे।
गुरुनानक की सीख
गुरुनानक के इस किस्से में ये संदेश दिया गया है कि अच्छाई को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना चाहिए। जबकि, बुराई को एक जगह सीमित कर देना चाहिए, तभी समाज का भला हो सकता है।