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दस महाविद्या कौन कौन सी है? जाने 10 महाविद्या की उत्पत्ति के बारे में

Updated on 01-01-1970 12:00 AM

महाविद्या काली पहली महाविद्या मानी जाती हैं जो माँ सती के शरीर से प्रकट हुई थी। इनका रूप अत्यंत भीषण व दुष्टों का संहार करने वाला हैं। माता सती ने क्रोधवश सबसे पहले अपने सबसे भीषण रूप को प्रकट किया था जो फुंफकार रही थी।

महाविद्या काली का रूप (Mahavidya Kali Ka Roop)

  • वर्ण: काला
  • केश: खुले हुए व अस्त-व्यस्त
  • वस्त्र: नग्न अवस्था
  • नेत्र: तीन
  • हाथ: चार
  • अस्त्र-शस्त्र व हाथों की मुद्रा: खड्ग, राक्षस की खोपड़ी, अभय मुद्रा, वर मुद्रा
  • मुख के भाव: अत्यधिक क्रोधित व फुंफकार मारती हुई
  • अन्य विशेषता: गले व कमर में राक्षसों की मुंडियों की माला, जीभ अत्यधिक लंबी व रक्त से भरी हुई।

महाविद्या काली का उद्देश्य (Mahavidya Kali Ka Mahatva)

रक्तबीज व शुंभ-निशुंभ राक्षसों का वध करने के लिए माँ काली का प्राकट्य हुआ था। रक्तबीज एक ऐसा राक्षस था जिसके रक्त की एक बूँद भी नीचे धरती पर गिरती तो उसमे से एक और रक्तबीज उत्पन्न हो जाता। तब मातारानी ने अपने इस भीषण रूप से उस राक्षस के रक्त की बूंदों को धरती पर गिरने से पहले ही उसे पी लिया था और उसका अंत किया था।

महाविद्या काली पूजा के फायदे (Mahavidya Kali Puja Ke Fayde)

  • शत्रुओं व दुष्टों का नाश होना
  • स्वयं में परिवर्तन आना
  • मन से बुरी प्रवत्तियों का निकलना
  • अभय का प्राप्त होना
  • समय की महत्ता होना इत्यादि।
  • महाविद्या तारा का रूप (Mahavidya Tara Ka Roop)

    • वर्ण: नीला
    • केश: खुले हुए व अस्त-व्यस्त
    • वस्त्र: बाघ की खाल
    • नेत्र: तीन
    • हाथ: चार
    • अस्त्र-शस्त्र व हाथों की मुद्रा: खड्ग, तलवार, कमल फूल व कैंची
    • मुख के भाव: आश्चर्यचकित व खुला हुआ
    • अन्य विशेषता: गले में सर्प व राक्षस नरमुंडों की माला।

    महाविद्या तारा का उद्देश्य (Mahavidya Tara Ka Mahatva)

    सतयुग में देव-दानवों के बीच हुए समुंद्र मंथन में जब अथाह मात्रा में विष निकला तो उसका पान महादेव ने किया किंतु विष के प्रभाव से उनके अंदर मूर्छा छाने लगी। तब माता पार्वती ने तारा रूप धरकर उन्हें स्तनपान करवाया जिससे शिवजी पर विष का प्रभाव कम हुआ।

    महाविद्या तारा पूजा के फायदे (Mahavidya Tara Puja Ke Fayde)

    • मातृत्व भाव का जागृत होना
    • संकटों का दूर होना
    • आर्थिक क्षेत्र में उन्नति
    • मोक्ष प्राप्ति इत्यादि।
    • महाविद्या त्रिपुर सुंदरी का रूप (Mahavidya Tripur Sundari Ka Roop)

      • वर्ण: सुनहरा
      • केश: खुले हुए व व्यवस्थित
      • वस्त्र: लाल रंग के
      • नेत्र: तीन
      • हाथ: चार
      • अस्त्र-शस्त्र व हाथों की मुद्रा: पुष्प रुपी पांच बाण, धनुष, अंकुश व फंदा
      • मुख के भाव: शांत व तेज चमक के साथ
      • अन्य विशेषता: भगवान शिव की नाभि से निकले कमल के आसन पर विराजमान।

      महाविद्या त्रिपुर सुंदरी का उद्देश्य (Mahavidya Tripur Sundari Ka Mahatva)

      पहले दो रूपों में मातारानी ने अपने भीषण रूप प्रकार किये थे। तत्पश्चात उनका यह सुंदर रूप प्रकट हुआ जो अत्यंत ही सुखकारी व मन को लुभा लेने वाला था। इनका प्राकट्य अपने भक्तों के मन से भय को समाप्त करने व अंतर्मन को शांति प्रदान करने वाला था।

      महाविद्या त्रिपुर सुंदरी पूजा के फायदे (Mahavidya Tripur Sundari Puja Ke Fayde)

      • सुंदर रूप की प्राप्ति होना
      • वैवाहिक जीवन का सुखमय रहना
      • जीवनसाथी की तलाश पूरी होना
      • मन का नियंत्रण में रहना
      • आत्मिक शांति का अनुभव करना इत्यादि।

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