शिवलिंग कभी खंडित क्यो नही होता है जरूर जानें।

हमारे हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार जब कोई मूर्ति कही से टूट जाती है तो उस मूर्ति की पूजा नही की जाती है क्योंकि वह मूर्ति खंडित हो जाती है। खंडित मूर्ति को नदी मे विसर्जित कर दिया जाता है। उसके बाद नये मूर्ति को लाकर उसकी पूजा की जाती है लेकिन दोस्तो क्या आपको मालूम है कि शिवलिंग कभी खंडित नही होता है। हमारे हिंदू धर्म मे लोग शिव जी पूजा शिवलिंग के रूप मे करते है। यदि शिवलिंग कही से टूट भी जाता है फिर भी लोग उसकी पूजा करते है क्योकि हमारे हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार शिवलिंग कभी भी खंडित नही होता है। आज के इस पोस्ट मे हम आपको विस्तार से बतायेगे कि आखिर शिवलिंग कभी खंडित क्यो नही होता है।

शिवलिंग कभी खंडित क्यो नही होता है-

दोस्तो हमारे हिंदू धर्म शास्त्र मे भगवान भोलेनाथ की पूजा शिवलिंग के रूप मे की जाती है। हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार यदि कोई मूर्ति टूट जाये तो वह खंडित होती है और खंडित मूर्ति की पूजा शास्त्रो के अनुसार अशुभ माना गया है। लेकिन दोस्तो शिवलिंग कभी भी खंडित नही होती है यदि शिवलिंग कही से टूट भी जाये तो उसे बदलने की परंपरा नही है क्योंकि भगवान शिव साक्षात ब्रम्ह स्वरूप है और इनका पूजन किसी भी रूप मे किया जा सकता है। यही कारण है कि यदि शिवलिंग किसी स्थान से टूट भी जाये तो उसे बदलने की परंपरा नही है। हमारे हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार भगवान शिव का न कोई आदि है और न ही कोई अंत।

शिवलिंग को ही शिव का निराकार रूप माना गया है। वही मूर्ति को उनका साकार रूप माना गया है। भगवान शिव की पूजा निराकार रूप मे ही की जाती है। यही कारण है कि शिवलिंग को कभी भी खंडित नही माना जाता है। वही घर मे पूजे जाने वाले किसी भी देवी देवता की खंडित मूर्ति को घर मे रखना और उसकी पूजा करना अशुभ माना जाता है। वास्तु के अनुसार खंडित मूर्ति घर मे नकारात्मकता लेकर आती है और उसका पूजन किया जाय तो घर मे अशांति का कारण बन सकती है यही कारण है कि खंडित मूर्ति का विर्सजन कर दिया जाता है या उसे पीपल के पेड के नीचे रख दिया जाता है।



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