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कौन हैं बाबा बौख नाग, इस गलती की वजह से हुआ उत्‍तरकाशी सुरंग का खतरनाक हादसा

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
बाबा बौख नाग की चर्चा इन दिनों जोरों पर है। उत्‍तराखंड में हुए सुरंग हादसे ने बाबा बौखनाथ के मंदिर को चर्चा में ला दिया है। मंगलवार को सिल्‍क्‍यारा टनल में फंसे सभी मजदूरों को 41 दिन की मशक्‍कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। लेकिन इस हादसे के बाद बाबा बौख नाग के मंदिर की चर्चा चारों तरफ हो रही है। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि बाबा बौख नाग के प्रकोप की वजह से यह हादसा हुआ है। दैवीय प्रकोप की बात सामने आने के बाद उत्‍तराखंड के मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने खुद बाबा बौख नाग की पूजा की थी। मजदूरों के सुरक्षित बाहर जाने के बाद धामी ने कहा कि बाबा बौख नाग की असीम कृपा से यह संभव हो पाया है। आइए आपको बताते हैं कौन हैं बाबा बौख नाग और क्‍या है इस मंदिर का इतिहास।

कौन हैं बाबा बौख नाग
बाबा बौख नाग पहाड़ों के देवता है और उनका मंदिर सिल्‍क्‍यारा सुंरग के ठीक ऊपर जंगल में बना हुआ है। स्‍थानीय लोगों का बाबा बौख नाग में अटूट विश्‍वास है और वे उन्‍हें अपना ईष्‍ट देव मानते हैं। बाबा बौख नाग को इस इलाके का रक्षक भी माना जाता है। सिर्फ उत्‍तराखंड ही नहीं दूर-दूर से यहां अन्य राज्‍यों के लोग भी बाबा बौख नाग की पूजा करने के लिए आते हैं। यहां के विषय में ऐसी मान्‍यता है मंदिर तक नंगे पैर चलकर आने वालों की बाबा हर मुराद पूरी करते हैं और उनकी खाली झोलियां भर देते हैं। बाबा बौख नाग यहां के स्‍थानीय क्षेत्र की तीन पट्टियों के देवता माने जाते हैं। यहां पर उनकी प्रतिमा नागराज के रूप में स्‍थापित है।

क्‍यों हुआ यह हादसा ?

स्‍थानीय मजदूर इस टनल हादसे के पीछे खुदाई करने वाली विदेशी कंपनी को जिम्‍मेदार मान रहे हैं। दरअसल हुआ यह कि जब 2019 में यह टनल बनाने के काम शुरू किया गया था तो कंपनी से मंदिर को हटा दिया था और मंदिर को टनल के पास दूसरे स्‍थान पर बनाने की बात कही थी। लेकिन 4 साल बीत जाने के बाद इस मंदिर का अभी तक निर्माण नहीं हुआ। स्‍थानीय लोगों का मानना है कि अधिकारियों की इन्‍हीं गलतियों की वजह से बाबा बौख नाग नाराज हो गए और इस वजह से यह हादसा हुआ।

मजदूरों को बाहर निकालने के लिए 41 दिन तक चला यह ऑपरेशन अब जाकर सफल हुआ है। अब मुख्‍यमंत्री पुष्‍कर सिंह धामी ने वादा किया है कि अब जल्‍द ही टनल के मुहाने पर मंदरि का भव्‍य निर्माण किया जाएगा।

बाबा बौख नाग का इतिहास

बाबा बौख नाग को पहाड़ों का रक्षक कहा जाता है और पूरे उत्‍तराखंड में कई स्‍थानों पर उनके मंदिर हैं। यहां के लोगों में ऐसा विश्‍वास है कि बाबा बौख नाग यहां नाग के रूप में प्रकट हुए थे और उन्‍होंने पहाड़ों की रक्षा का बीड़ा उठाया था। यहां हर साल मेला लगता है और दूर-दूर से लोग इसको देखने आते हैं। दरअसल ऐसी मान्‍यता है कि उत्‍तरकाशी में जब कोई सुरंग बनती है तो उसके मुहाने पर बाबा बौख नाग का मंदिर जरूर बनाया जाता है। लेकिन इस सुंरग को बनाने में इस नियम का पालन न करने की वजह से यहा हादसा हुआ है।

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