Select Date:

लहसुन और प्याज का सेवन ब्राम्हण क्यो नही करते है।

Updated on 01-01-1970 12:00 AM
आज के समय मे लोग लहसुन और प्याज के बिना कोई सब्जी ही नही बनाते है। लहसुन और प्याज का इस्तेमाल लगभग हर घर मे किया जाता है। लेकिन दोस्तो क्या आप जानते है लहसुन और प्याज का सेवन ब्राम्हण कभी नही करते है। इसकी कहानी समुद्र मंथन से जुडी हुई है। हमारे हिंदू धर्म शास्त्रों मे लहसुन और प्याज का सेवन वर्जित बताया गया है अर्थात हमारे हिंदू धर्म शास्त्र के अनुसार लहसुन और प्याज का सेवन हमें नही करना चाहिये। आज के इस पोस्ट मे हम आपको विस्तार से बतायेंगे कि लहसुन और प्याज का सेवन हमें क्यो नही करना चाहिये।

लहसुन और प्याज का सेवन ब्राम्हण क्यो नही करते है-

दोस्तो जब देवता और दैत्य दोनो मिलकर समुद्र मंथन कर रहे थे तब समुद्र के गर्भ से चौदह रत्न बाहर निकले थे। जिसमे से एक रत्न अमृत भी था। उस समय देवता और दैत्य दोनो अमृत पीने के लिये आपस मे लड रहे थे क्योंकि उसे जो भी पी लेता वो सदा-सदा के लिये अमर बन जाता उसे कोई नही मार सकता था। इसके निवारण के लिये भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया था। मोहिनी ने सभी देवता और दैत्यो से कहा कि आप लोग आपस मे मत लडिये इस अमृत पर देवता और दैत्य दोनो का अधिकार है इसीलिये सबको अमृत मिलेगा।

अतः सभी देवता और दैत्य दो पंक्तियों मे बैठ जाये एक पंक्ति मे देवता बैठेंगे और दूसरे पंक्ति मे सभी दैत्य बैठेंगे। अतः मै सबसे पहले देवताओं को अमृत पिलाऊंगी उसके बाद दैत्यो को अमृत पिलाऊंगी। यह कहकर मोहिनी ने सबसे पहले देवताओं को अमृत पिलाना शुरू किया। दैत्यों मे एक राहू नाम का दैत्य था वो काफी होशियार था अतः उसने देवता का रूप धारण करके देवताओं की पंक्ति मे बैठ गया। मोहिनी ने उस पर ध्यान नही दिया और उसे अमृत पिला ही रही थी तो सूर्य और चंद्र ने कहा कि यह देवता नही है यह कोई बहरूपिया है जो देवता का वेश धारण करके हमारे पंक्ति मे बैठ गया है।

तब राहू अपने असली रूप मे आ गया और जोर-जोर हंसने लगा और कहने लगा कि अब मै अमर हो गया हूँ अतः अब मुझे कोई नही मार सकता है। तब भगवान विष्णु मोहिनी का रूप त्यागकर अपने असली रूप मज आ गये और अपने सुदर्शन चक्र से राहू का सिर धड से अलग कर दिया चूंकि राहू ने अमृत पी लिया था इसीलिये वह मरा नही। उसका सिर राहू और बाकी का धड केतू कहा जाता है। जब भगवान विष्णु ने राहू का सिर सुदर्शन चक्र से धड से अलग किया था उसी समय खून की कुछ बूंदे धरती पर आ गिरी जिससे लहसुन और प्याज की उत्पत्ति हुई। यही वजह है कि इन्हे खाने से इंसान के मुंह से गंध आती है।

इसके पीछे का एक वैज्ञानिक कारण भी है। आर्युवेद मे खाद्य पदार्थों को तीन भागो मे बांटा गया है सात्विक, राजसिक, तामसिक। लहसुन और प्याज को राजसिक और तामसिक मे रखा गया है। ये तामसिक चीजें मनुष्य मे कुछ केमिकल रिएक्शन को बढावा देती है जिससे उत्तेजना बढाने वाले हार्मोन शरीर मे ज्यादा प्रवाह होते है। अध्यात्म के अनुसार उत्तेजना से अध्यात्म के मार्ग पर चलने से समस्या उत्पन्न होती है जिससे एकाग्रता बाधित होती है और संयम क्षमता का नाश होता है। इसी कारण सनातन धर्म मे इन तामसिक चीजो के सेवन पर मनाही है।



अन्य महत्वपुर्ण खबरें

 01 January 1970
महाविद्या काली पहली महाविद्या मानी जाती हैं जो माँ सती के शरीर से प्रकट हुई थी। इनका रूप अत्यंत भीषण व दुष्टों का संहार करने वाला हैं। माता सती ने क्रोधवश…
 01 January 1970
हम सभी यह तो जानते हैं कि भगवान परशुराम विष्णु के छठे अवतार (Bhagwan Parshuram Bhishma Pitamah Ka Yudh) थे जिन्होंने इक्कीस बार पृथ्वी से हैहय वंश के क्षत्रियों का…
 01 January 1970
धर्म ।  शारदीय नवरात्रि के छठे दिन आदिशक्ति मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। अविवाहितों को शीघ्र विवाह के लिए माता कात्यायनी की पूजा…
 01 January 1970
विवाहित महिलाएं अपने पति की सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए हर साल करवा चौथ का व्रत रखती हैं। कई जगहों पर यह व्रत कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं। इस…
 01 January 1970
सिख भारतीय आबादी का लगभग 2 प्रतिशत हैं. अन्य धर्मों की तुलना में, सिख धर्म एक छोटा और अल्पसंख्यक धर्म है. ‘सिख’ शब्द का अर्थ है एक शिष्य और इस…
 01 January 1970
मंगलवार, 24 अक्टूबर को दशहरा है। त्रेता युग में आश्विन मास की कृष्ण दशमी पर श्रीराम ने रावण का वध किया था। श्रीराम के जीवन की कई ऐसी घटनाएं हैं,…
 01 January 1970
मंगलवार, 24 अक्टूबर को दशहरा है। त्रेतायुग में श्रीराम ने आश्विन कृष्ण दशमी पर रावण का वध किया था। रामायण में कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें जीवन को सुखी और…
 01 January 1970
एक समय एक संत भगवान राम को बहुत मानते थे। वे भगवान राम को अपना शिष्य मानते थे और शिष्य पुत्र के समान होता है, इसलिए माता सीता को पुत्रवधु…
 01 January 1970
इंसान की चौथी पत्नी ही (Story of four wives) साथ देती है एक शिक्षाप्रद कहानी है। वैशाख पूर्णिमा के दिन बुध पुर्णिमा मनाई जाती है। क्या आप जानते हैं कि…
Advt.