मनुष्य का भाग्य कब लिखा जाता है जरूर जानें।

दोस्तो इस दुनिया मे दो किस्म के लोग मौजूद है पहले वो जो कि आस्तिक होते है अर्थात ईश्वर की सत्ता पर विश्वास करते है ऐसे लोग भाग्य पर भी विश्वास करते है लेकिन कुछ लोग ऐसे होते है जो कि नास्तिक होते है अर्थात वो ईश्वर पर विश्वास नही करते है ऐसे लोग भाग्य पर भी विश्वास नही करते है। दोस्तो यदि देखा जाय तो सबकुछ ईश्वर के द्वारा पहले से ही निर्धारित होता है। जब बच्चा धरती पर जन्म लेता है

तो उसके जन्म से पूर्व ही उसके भाग्य का निर्धारण ईश्वर द्वारा कर दिया जाता है ऐसे मे कुछ लोग ये कहेंगे कि जब सबकुछ हमारे भाग्य मे पहले से ही निर्धारित है तो हमें कर्म करने की क्या आवश्यकता है तो दोस्तो मै आपको बता दूं कि कर्म करना बहुत जरूरी है क्योंकि जो हम कर्म करते है इसी कर्म के आधार पर हमारा अगला जन्म निर्धारित होता है। आज हम इसी के बारे मे आपको विस्तार से जानकारी देगें।

मनुष्य का भाग्य कब लिखा जाता है-

  • कंस की मृत्यु की आकाशवाणी पहले ही हो चुकी थी जिसमे कहा गया था कि देवकी के गर्भ से स्वयं भगवान जन्म लेगे जो कि देवकी का आठवां संतान होगा और उसी के हाथो कंस का वध होगा। भविष्यवाणी के अनुसार देवकी के गर्भ से श्री कृष्ण ने अवतार लिया था और इन्होने नियति द्वारा निर्धारित समय पर कंस का वध भी किया और अपने माता पिता को कारागार से मुक्त भी करवाया तो दोस्तो यह सबकुछ पहले से ही निर्धारित था। दोस्तो जो भी मनुष्य इस धरती पर जन्म लेता है
  • उसका भाग्य सबकुछ विधाता द्वारा पहले से निर्धारित कर दिया जाता है जैसे कि शिशु का जन्म कब कहां तथा कैसे होगा उसके जीवन मे क्या-क्या घटनाये घटित होगी। उसका विवाह कब कहां तथा कैसे होगा और किससे होगा। बच्चा अपने जीवन मे कितना कमायेगा और कितनी प्रापर्टी बनायेगा। बच्चे की मृत्यु कब कहां तथा कैसे होगी ये सबकुछ पहले से ही निर्धारित होता है। दोस्तो एक बार जो विधाता ने लिख दिया वो चाहकर भी नही बदला जा सकता है वो घटित होना ही होना है तथा इसे कोई नही रोक सकता है। दोस्तो रामायण आपने देखा होगा यह पहले से ही निश्चित था कि भगवान राम को चौदह वर्ष का वनवास मिलेगा।
  • इसका मुख्य कारण भगवान श्री राम के द्वारा रावण का वध होना निश्चित था। दोस्तो एक बात का ध्यान रखियेगा कि आप अच्छे या बुरे जैसे भी कर्म करते है इसी के आधार पर आपका अगला जन्म और भाग्य निर्धारित होता है। हमारे हिंदू धर्म शास्त्रों मे कर्म को प्रधान कहा गया है क्योंकि बिना कर्म के भाग्य कहां बनता है। मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य उस परमपिता परमेश्वर को प्राप्त करना है यदि आप उस परमेश्वर को प्राप्त कर लेते है तो आप 84 के चक्कर से मुक्त हो जायेगें। साथ ही साथ आप हमेशा के लिये जन्म मरण के चक्कर से मुक्त हो जायेंगे आपको दोबारा इस मृत्यु लोक मे जन्म नही लेना पडेगा क्योंकि आपकी आत्मा उस परमपिता परमेश्वर मे विलीन हो जायेगी।
  • जिससे आपको मुक्ति मिल जायेगी। इसीलिये हमें हमेशा अच्छे कर्म करने चाहिये। हमेशा हमें दूसरो का भला करना चाहिये। यदि आपके नजर मे कोई गरीब है दीनहीन है तो उसकी हमें मदद करनी चाहिये। ब्राम्हण और साधुजनों का हमें आदर सत्कार करना चाहिये।हमेशा हमें ईश्वर की पूजा करनी चाहिये उसका प्रतिदिन हमें सुमिरन करना चाहिये। जिससे ये हमारा मानव जीवन सफल हो सके। लेकिन एक बात ध्यान रखियेगा यदि आप बुरे कर्म करते है लोगो को सताते है या लोगो को आप परेशान कर रहे है तो आपको उसकी सजा इसी जन्म मे भोगना पडेगा।

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